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BARKING "छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में AIDSO का प्रदर्शन, प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन"

संघर्ष एकता प्रगति ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन जिलाा कमेटी धमतरी

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ज्ञात हो कि ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (AIDSO)की केंद्रीय परिषद द्वारा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बर्बर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागने, तथा पुलिस द्वारा सोनम वांगचुक को जबरन हटाए जाने के विरोध में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के आहवान पर आज 22 जुलाई को एआईडीएसओ धमतरी जिला कमेटी द्वारा तहसील कार्यालय कुरूद के सामने विरोध प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री के नाम नायब तहसीलदार योगेंद्र निर्मलकर को ज्ञापन सौंपा गया।

हम, भारत के नागरिकों ने हाल ही में अपने देश में लोकतंत्र का वास्तविक चेहरा देखा है। जब छात्र न्याय की मांग को लेकर शांतिपूर्वक जंतर-मंतर पर एकत्र हुए, तब केंद्र सरकार के अधीन कार्यरत दिल्ली पुलिस ने उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन का जवाब बुरी तरह हिंसा किया। प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया, आँसू गैस के गोले छोड़े गए, जिसके परिणामस्वरूप सैकड़ों छात्र-युवा घायल हुए और अनेक को हिरासत में ले लिया गया। लोकतांत्रिक संवाद शुरू करने के बजाय सोनम वांगचुक को बलपूर्वक हटाए जाने तथा NEET पेपर लीक के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर किए गए क्रूर एवं अलोकतांत्रिक दमन की एआईडीएसओ कड़ी निंदा करता है। देशव्यापी आंदोलन, जो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे तथा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को समाप्त करने की मांग कर रहा है, उसे हिंसक तरीके से कुचलने का सरकारी प्रयास केंद्र सरकार के छात्र-विरोधी और जन-विरोधी चरित्र को उजागर करता है। सरकार के व्यापक दमन के बावजूद छात्रों और युवाओं ने अदम्य साहस का परिचय दिया तथा शासकों को कहीं भी चैन से बैठने का अवसर नहीं दिया। समाज के सभी वर्गों के लोगों ने छात्रों और युवाओं के इस साहसिक एवं समझौतारहित संघर्ष को सलाम किया तथा भाजपा-नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा किए गए इस निर्मम हमले की कड़ी आलोचना की। सरकार देश की जन-चेतना की आवाज़ के प्रति लगातार अहंकारी रवैया अपनाती रही है।

सरकार ने हिंसा का सहारा लेकर तथा मूल मुद्दे पर मौन रहकर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह इस संकट में जान गंवाने वाले युवाओं के प्रति कोई जवाबदेही स्वीकार नहीं करती। पिछले दो महीनों में सार्वजनिक शिक्षा की गरिमा के प्रति सरकार की पूर्ण उपेक्षा सामने आई है। भ्रष्टाचार और प्रश्नपत्र लीक के कारण उत्पन्न असहनीय मानसिक दबाव, चिंता और निराशा ने बीस से अधिक अभ्यर्थियों की जान ले ली है। इन मौतों के लिए केंद्र सरकार प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार है और उसे इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। प्रश्नपत्र लीक की यह कोई अकेली घटना नहीं है। पिछले दस वर्षों में पूरे देश में लगभग 89 प्रमुख परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हैं, जिसके कारण 48 बार पुनः परीक्षा आयोजित करनी पड़ी और करोड़ों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ।

जो छात्र दिन-रात कठिन परिश्रम करके अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं, उनका भविष्य एक ऐसी व्यवस्था द्वारा नष्ट किया जा रहा है जिसे उनकी मेहनत और जीवन की कोई परवाह नहीं है। अब समय आ गया है कि हम सब एकजुट हों, संगठित हों और इस छात्र-विरोधी एवं जन-विरोधी व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष करें। हमारा विश्वास है कि पुलिस की लाठियाँ और निरंकुश दमनकारी उपाय छात्रों और युवाओं की आवाज़ को कभी दबा नहीं सकते। एआईडीएसओ देश के सभी नागरिकों—अभिभावकों, शिक्षाविदों, छात्रों, युवाओं, मजदूरों और किसानों—से अपील करता है कि वे इस जनआंदोलन को और अधिक व्यापक बनाएं। इस प्रदर्शन में जिला अध्यक्ष डारेंद्र कुमार , जिला सचिव चंद्रभान चक्रधारी, विनय यादव , कमलनारायण साहू , भाविका साहू , लेमप्रकाश , नेमचंद लहरे , तेजपाल तोड़कर, पंकज , लेखराम, मुकेश , टेमन, भावेश , युवराज, जागृति , संध्या, वासिनी, महेश्वर यादव, चिंटू देवांगन, वैशाली, चेतना, गरिमा, कालेश्वर, तुलसी, रामकिशोर, संतु लहरे, लिलेश्वरी, हेमलता, रूखमणि, हर्ष सहित 70 छात्र छात्राएं शामिल रहे ।

 मांगें

1. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तत्काल इस्तीफा दें।

2. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA)को समाप्त किया जाए।

3. प्रदर्शनकारियों के प्रति सरकार और पुलिस का अलोकतांत्रिक एवं दमनकारी व्यवहार तुरंत बंद किया जाए।

4. सरकार प्रदर्शनकारियों के साथ लोकतांत्रिक संवाद और चर्चा का मार्ग तत्काल खोले।

5. सार्वजनिक शिक्षा की रक्षा की जाए।

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