रायपुर महासमुंद इंडसइंड बैंक के एक शाखा प्रबंधक (ब्रांच मैनेजर) पर ग्राहक से एक लाख रुपये की रिश्वत मांगने, धोखाधड़ी करने और आरबीआई (RBI) व सुप्रीम कोर्ट के नियमों को ताक पर रखकर बिना नोटिस व बिना एनपीए (NPA) हुए जबरन ट्रक जब्त करने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित ट्रांसपोर्टर की शिकायत के बाद बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) कार्यालय से मामले की उच्च स्तरीय जांच का आश्वासन मिला है।
खुद तय किया सौदा, फिर शुरू हुआ खेलपीड़ित के पास इंडसइंड बैंक से फाइनेंस कराए गए दो ट्रक थे। वे अपने एक ट्रक (CG06GT3467) को बेचकर उसका लोन फोरक्लोज (समय से पहले बंद) करना चाहते थे, जबकि दूसरे ट्रक (CG06HA7227) को अपने पास रखना चाहते थे। आरोप है कि 2 जून को बैंक मैनेजर सुजीत शनीकर ने खुद एक ग्राहक से 17.50 लाख रुपये में गाड़ी का सौदा तय किया और पीड़ित को खरीदार से बात तक नहीं करने दी। उसी शाम कुटेला ब्रिज के पास पीड़ित को फोरक्लोजर राशि करीब 18.70 लाख रुपये बताई गई। इसके बाद रिकवरी एजेंट पुरुषोत्तम साहू और बैंक कर्मचारी विद्या साहू की मौजूदगी में जबरन गाड़ी को कब्जे में ले लिया गया और इन्वेंट्री पेपर पर हस्ताक्षर कराकर उसकी कॉपी पीड़ित को नहीं दी गई।
एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग और धमकीशिकायत के मुताबिक, जून महीने के दौरान जब पीड़ित ने फोरक्लोजर अमाउंट का प्रिंटआउट मांगा, तो मैनेजर ने साफ मना कर दिया। मैनेजर ने दावा किया कि वह कंपनी से बात करके 3 लाख रुपये का वेवर (छूट) दिला देगा, जिसके बदले उसे 1 लाख रुपये नगद चाहिए। जब पीड़ित ने रिश्वत देने से मना किया और उच्च अधिकारियों से बात करने की मांग की, तो मैनेजर भड़क गया और उसके दूसरे ट्रक (CG06HA7227) को सीज करने की धमकी दी।झांसा देकर कराए हस्ताक्षर, पैसों में हेरफेर25 जून को नाम ट्रांसफर की प्रक्रिया के दौरान मैनेजर ने पीड़ित को झांसा दिया कि बची हुई राशि उसके दूसरे ट्रक के खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। मैनेजर के कहने पर रिकवरी एजेंट ने पीड़ित के फोन पर आए ओटीपी के जरिए 1,03,000 रुपये उसी गाड़ी (CG06GT3467) में काट दिए जो बेची जा चुकी थी। विरोध करने पर अगले दिन काफी मिन्नत के बाद केवल 70,000 रुपये दूसरे ट्रक के खाते में एडजस्ट किए गए।
4 अगस्त को जब पीड़ित ने बैंक के सीसीटीवी कैमरे के सामने रिश्वत मांगने का विरोध किया और पुलिस में शिकायत की बात कही, तो मैनेजर ने अंजाम भुगतने की धमकी दी।सुप्रीम कोर्ट और आरबीआई के नियमों की धज्जियां उड़ींधमकी के ठीक दो दिन बाद, 6 अगस्त को बैंक मैनेजर और रायगढ़ की भारत यादव रेपो एजेंसी ने नियमों को ताक पर रखकर पीड़ित के दूसरे ट्रक (CG06HA7227) को जबरन सीज कर दिया।
चौंकाने वाली बात यह है कि जिस वक्त गाड़ी को जब्त किया गया, उस समय वह खाता न तो एनपीए (NPA) था, न ही पीड़ित को कोई कानूनी नोटिस दिया गया था और न ही कोई अदालती आदेश था। जब्ती के करीब एक सप्ताह बाद बैंक रिकॉर्ड में खाते को एनपीए दिखाया गया, जो आरबीआई की गाइडलाइंस और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का खुला उल्लंघन है।एमडी से शिकायत, जांच शुरूइस पूरे मामले में पीड़ित ने इंडसइंड बैंक के शीर्ष प्रबंधन और एमडी (MD) से साक्ष्यों के साथ लिखित शिकायत की है। बैंक मुख्यालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आंतरिक जांच शुरू करने का आश्वासन दिया है।


