संवाददाता प्रज्ञानंद दबंग साहू
बलौदाबाजार (कसडोल) शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूलों में शिक्षकों की घोर लापरवाही और मनमानी का एक गंभीर मामला सामने आया है। कसडोल विकासखंड अंतर्गत आने वाले शासकीय प्राथमिक शाला गीडोला में पिछले दो दिनों से बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। यहाँ शिक्षक स्कूल से नदारद हैं और स्कूल समय से काफी पहले ही बंद कर दिया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गीडोला स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि स्कूल में पदस्थ शिक्षक अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय मनमानी कर रहे हैं:
गुरुवार: स्कूल में कोई भी शिक्षक नहीं पहुँचा और स्कूल दोपहर 1:30 बजे ही बंद कर दिया गया।
शुक्रवार: स्थिति और भी बदतर रही, जहाँ शिक्षक के न आने के कारण स्कूल दोपहर 12:30 बजे ही बंद कर दिया गया।
शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन
राज्य सरकार द्वारा निर्धारित समयावधि तक स्कूल का संचालन अनिवार्य है, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। लेकिन गीडोला प्राथमिक शाला में शिक्षकों की लगातार दो दिनों की अनुपस्थिति ने विभागीय कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
समय से पहले स्कूल बंद होने के कारण छोटे-छोटे बच्चे घर लौटने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे न केवल उनकी पढ़ाई का नुकसान हो रहा है, बल्कि स्कूल की सुरक्षा और बच्चों की जिम्मेदारी पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।
ग्रामीणों में आक्रोश
लगातार दो दिनों तक शिक्षकों के स्कूल न आने और स्कूल के समय से पहले बंद होने से पालकों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शिक्षकों को स्कूल नहीं आना है, तो शासन बच्चों के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ क्यों कर रहा है? उन्होंने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करने और लापरवाह शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
