सहकारी बैंक शाखा बया के प्रबंधक पर फर्जी मध्यमकालीन ऋण स्वीकृत करने का गंभीर आरोप, करोड़ों के टैक्स चोरी का भी मामला।
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाज़ार-भाटापारा जिले के अंतर्गत स्थित जिला सहकारी बैंक शाखा बया के शाखा प्रबंधक श्री माधव लाल नायक गंभीर आरोपों के घेरे में आ गए हैं। एक शिकायत के अनुसार, शाखा प्रबंधक पर किसान और व्यापारियों के साथ साठगाँठ करके करोड़ों रुपयों के फ़र्ज़ी मध्यमकालीन ऋण (Medium Term Loans) स्वीकृत करने का आरोप लगाया गया है। यह मामला न केवल वित्तीय अनियमितता का है, बल्कि इसमें सरकारी राजस्व (टैक्स) को लाखों रुपये का नुकसान पहुँचाने की बात भी सामने आई है।
📌 जाँच के मुख्य बिंदु:
शिकायत में कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं, जो विस्तृत जाँच की मांग करते हैं:
* फर्जी ऋण स्वीकृति: आरोप है कि शाखा प्रबंधक माधव लाल नायक ने किसानों के जीवन यापन के लिए निर्धारित शासकीय भूमि पर भी फ़र्ज़ी तरीके से ऋण स्वीकृत किया है।
* 20% से 25% कमीशन की मांग: स्वीकृत ऋण के एवज में, शाखा प्रबंधक पर ऋणी किसानों से 20% से 25% तक कमीशन मांगने का गंभीर आरोप है।
* फर्जी GST बिल का उपयोग: ऋण स्वीकृत करने के लिए, शाखा प्रबंधक द्वारा फर्जी (मैनुअल) GST बिल का इस्तेमाल किया गया, जिससे यह स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है।
* सरकारी राजस्व को नुकसान: फर्जी GST बिल लगाकर, शाखा प्रबंधक ने राज्य सरकार के कर खजाने (टैक्स) को लाखों रुपयों का नुकसान पहुँचाया है। यह अतिरिक्त लाभ कमाने के लिए किया गया एक बड़ा वित्तीय अपराध माना जा रहा है।
* कागजी बाड़बंदी (Fence) योजना: शिकायत में यह भी बताया गया है कि जिन किसानों को ऋण दिया गया है, उनमें से किसी भी किसान के खेत में कांटेदार तार (बारबेड वायर) या जाली और खंभों का उपयोग नहीं किया गया है। यह दर्शाता है कि ऋण सिर्फ कागज़ों पर ही स्वीकृत किया गया, जबकि मौके पर कोई काम नहीं हुआ।
🏛️ उच्च स्तरीय जाँच की मांग:
शिकायतकर्ता ने श्रीमान महोदय से शाखा प्रबंधक माधव लाल नायक के पूरे कार्यकाल में स्वीकृत की गई सभी राशियों की विस्तृत जाँच करने का सादर निवेदन किया है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, शिकायत की प्रतिलिपि वित्त मंत्री, कृषि मंत्री, सहकारिता मंत्री (छ.ग. शासन) के साथ-साथ कलेक्टर बलौदाबाज़ार भाटापारा और सहकारिता विभाग के उच्चाधिकारियों को भी आवश्यक कार्यवाही हेतु भेजी गई है।
यह मामला छत्तीसगढ़ सहकारिता क्षेत्र में एक बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है और राज्य शासन को इस पर त्वरित और कठोर कार्यवाही करने की आवश्यकता है।


